स्वास्थ्य विभाग के कार्यों पर उठे गंभीर सवाल: बस्ती जिले के विकास खंड कुदरहा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में प्रभारी चिकित्साधिकारी की दोबारा तैनाती को लेकर बड़ा विवाद मच गया है।
कार्यकर्ताओं की उपेक्षा: आरोप है कि यह प्रभारी जनप्रतिनिधियों और पार्टी कार्यकर्ताओं का सम्मान नहीं करते हैं, जिससे नगर पंचायत गायघाट समेत पूरे क्षेत्र में रोष व्याप्त है।
अजीत मिश्रा (खोजी)
स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल: कुदरहा सीएचसी प्रभारी की दोबारा तैनाती पर मचा बवाल
- हटाए गए चिकित्साधिकारी को मिला पुनः प्रभार: पूर्व में शिकायतों और विधायक-जिला प्रभारी की आपत्तियों के बाद हटाए गए डॉ. फैज वारिस को आठ महीने बाद फिर से कुदरहा का प्रभारी चिकित्साधिकारी बना दिया गया है।
- भाजपा मंडल अध्यक्ष ने कमिश्नर को भेजा शिकायती पत्र: भाजपा मंडल कुदरहा के अध्यक्ष दुर्गेश कुमार अग्रहरि ने बस्ती मंडल के आयुक्त को पत्र लिखकर इस दोबारा तैनाती का कड़ा विरोध जताया है।
- भ्रष्टाचार और अनियमितता के गंभीर आरोप: पत्र में आरोप लगाया गया है कि पूर्व कार्यकाल के दौरान मरीजों को अस्पताल की जगह बाहर की दवाइयां लिखी जाती थीं और कमीशन के चक्कर में कई भुगतानों को रोक कर रखा गया था।
- अनुभवी चिकित्सक की तैनाती की मांग: भाजपा नेता ने शासन की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का हवाला देते हुए डॉ. फैज वारिस का स्थानांतरण कर किसी अन्य अनुभवी चिकित्सक को जिम्मेदारी सौंपने की मांग की है।
बस्ती: जिले के स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर से सुर्खियों और तीखे सवालों के घेरे में आ गई है। मामला विकास खंड कुदरहा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) का है, जहां पहले शिकायतों के आधार पर हटाए गए चिकित्साधिकारी को दोबारा प्रभार सौंपे जाने के बाद क्षेत्र में जबरदस्त आक्रोश और राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है।

क्या है पूरा मामला?
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मंडल कुदरहा के मंडल अध्यक्ष दुर्गेश कुमार अग्रहरि ने बस्ती मंडल के आयुक्त को एक तीखा शिकायती पत्र भेजा है। पत्र के माध्यम से उन्होंने डॉ. फैज वारिस को कुदरहा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्साधिकारी के रूप में पुनः तैनात किए जाने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
शिक पत्र के अनुसार, डॉ. फैज वारिस पिछले 13 वर्षों से लगातार इसी जनपद और विकास खंड में कार्यरत हैं। महादेवा विधानसभा क्षेत्र के विधायक दूधराम और भाजपा जिला प्रभारी अजय सिंह गौतम द्वारा की गई शिकायतों के बाद, 14 नवंबर 2025 को उन्हें पद से हटा दिया गया था। हालांकि, मात्र आठ महीने का समय बीतने के बाद मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) बस्ती द्वारा 17 जुलाई 2026 को जारी आदेश के तहत उन्हें फिर से कुदरहा का प्रभारी चिकित्साधिकारी बना दिया गया, जिसे लेकर स्थानीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
लगाए गए गंभीर आरोप
भाजपा मंडल अध्यक्ष द्वारा भेजे गए पत्र में चिकित्सक पर कई गंभीर और प्रशासनिक अनियमितता के आरोप मढ़े गए हैं:
- भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी: आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान सीएचसी पर भ्रष्टाचार चरम सीमा पर था। अस्पताल में दवाइयां उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को बाहर से कमीशन वाली दवाइयां लिखी जाती थीं।
- भुगतान रोकने का मामला: आरबीएसके (RBSK) और आरआई (RI) की गाड़ियों का भुगतान कमीशन के चक्कर में पिछले दो वर्षों से रोक रखा गया है। भाजपा जिलाध्यक्ष विवेकानंद मिश्रा द्वारा कहे जाने के बावजूद इन भुगतानों को जारी नहीं किया गया।
- अधिकारियों की उदासीनता: पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि इन समस्याओं को लेकर जब मुख्य चिकित्साधिकारी से मिलने का प्रयास किया गया, तो न तो मुलाकात हुई और न ही फोन उठाया गया।
- कार्यकर्ताओं की उपेक्षा: आरोप है कि यह प्रभारी जनप्रतिनिधियों और पार्टी कार्यकर्ताओं का सम्मान नहीं करते हैं, जिससे नगर पंचायत गायघाट समेत पूरे क्षेत्र में रोष व्याप्त है।
की गई सख्त कार्रवाई की मांग
भाजपा मंडल अध्यक्ष ने कमिश्नर से मांग की है कि जनहित और सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को प्रभावी बनाए रखने के लिए डॉ. फैज वारिस का स्थानांतरण किसी अन्य विकास खंड में किया जाए। साथ ही, कुदरहा सीएचसी की कमान किसी अन्य अनुभवी चिकित्सक को सौंपी जाए ताकि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हो सके। इस शिकायती पत्र की प्रतिलिपि स्वास्थ्य परिवार कल्याण निदेशक, जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और मुख्य चिकित्साधिकारी बस्ती को भी सूचनार्थ प्रेषित की गई है।















